*विद्यार्थी री व्यथा*
टन - टन की टंकोर साथे
टाबर टोली भागती
स्कूलों के आंगन माय
नव कालिया खिल जावती।।
प्रार्थना में प्रेम बरसतो
कक्षाओं में कलरव
अभिव्यक्ति रो आनंद मिलतो
सरस्वती रो सिमरन।।
मास्टरां सूं मान पावता
मैडम सूं ममता
स्कूलों रे आंगन माय
दौड़ दौड़ ने रमता।।
प्रिंसिपल जी सूं प्यार पावता
सहपाठियों सूं साथ
खाली पीरियड में खेल खेलता
होम वर्क हाथो हाथ।।
नाश्ते में दूध पीवता
मध्यांतर में मिड डे मील
पेटभर खूब खावता
नहीं राखता ढील।।
विद्यार्थी व्यथा में फसगिया
कुण बातावें सवाल
थारे बिन गुरूजी
बुरा व्हे हवाल।।
अध्यापकों रो ओहदो बदल गयो
घर - घर घूमे रोज
चिकित्सा विभाग रो साथ निभावे
करे कोरोना री खोज।।
कक्षा कक्ष सब बंद पड़िया
सूना पडिया हैं ऑफिस
अध्यापक उलझन में पडिया
कुण पढ़ावे टॉपिक।।
विद्यार्थी विपदा पडिया
फैल होंगे या पास
सरकारी आदेश सूं
सबकी बचगी लाज।।
बोर्ड परीक्षा में बैठण वाला
रोज करे इंतजार
बाकी परीक्षा करावण रो
कब निकलेला फरमान।।
टाबर बेचारा तड़प रिया
घर में हो गया वास
विद्यालयों रा वार्ड बन गया
अध्यापकों सूं आस।।
ई-लर्निंग स्टार्ट करियो
रोज भेजे लिंक
टीचर बिना टारगेट
दोरो व्हे असिव।।
जीताराम जगत में
विद्या उतम दान
विद्यर्थियों री विद्वता सूं
मिले मान सम्मान।।
यह रचना स्वरचित,मौलिक एवं अप्रकाशित है।
जीताराम मकवाना
वरिष्ठ अध्यापक
राजकीय उ मा विद्यालय
चारलाई कलां, बाड़मेर, राजस्थान
मो. न.9602259105
बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंधन्यवाद प्रिय
हटाएंShandar rachana
जवाब देंहटाएंThanks you
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